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		<title>मान कैबिनेट के बड़े फैसले, डिजिटल यूनिवर्सिटी से लेकर प्राइवेट स्कूल फीस तक कई प्रस्तावों को मंजूरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[trendstopicnews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 11:53:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। हरपाल चीमा ने बताया कि कैबिनेट ने &#8216;द पंजाब प्राइवेट डिजिटल ओपन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">हरपाल चीमा ने बताया कि कैबिनेट ने <strong>&#8216;द पंजाब प्राइवेट डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी पॉलिसी&#8217;</strong> को मंजूरी दे दी है। इसके तहत राज्य में तीन नई डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएंगी। इनमें एक होशियारपुर और दो पटियाला में बनाई जाएंगी। पटियाला के गांव फतेहपुर में एक यूनिवर्सिटी स्थापित होगी, जबकि विश्व प्रसिद्ध एजुकेशन ब्रांड <strong>फिजिक्स वाला</strong> पटियाला के गांव आनंदपुर केशव में डिजिटल यूनिवर्सिटी खोलेगा। वहीं, होशियारपुर में क्लाउड यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी, जहां आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकार के अधीन कॉन्ट्रैक्ट पर लाने के लिए सरकार एक विशेष मनी बिल ला रही है। इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा में पेश कर पारित कराया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि निजी स्कूलों में मनमाने फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए लाए गए अध्यादेश को विधेयक में बदलने की मंजूरी दे दी गई है। विधानसभा और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। इसके तहत कोई भी निजी स्कूल 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। यदि कोई स्कूल इससे अधिक फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे नियामक (रेगुलेटरी) संस्था से अनुमति लेनी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">कैबिनेट ने <strong>&#8216;पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ ट्रीज़ बिल&#8217;</strong> को भी मंजूरी दी है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति एक पेड़ काटता है तो उसे 10 नए पेड़ लगाने होंगे। ऐसा नहीं करने पर पहली बार प्रति पेड़ 10 हजार रुपये, दूसरी बार 35 हजार रुपये और तीसरी बार 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।</p>
<p>इसके अलावा कैबिनेट ने पंजाब लोक निर्माण विभाग (PWD) में सिविल पदों पर सीधी भर्ती को भी मंजूरी दे दी है, जिससे विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का रास्ता साफ हो गया है।</p>
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		<title>पंजाब विधानसभा में रोजगार और औद्योगिक निवेश पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[trendstopicnews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 09:52:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[punjab]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन ने रोजगार सृजन और औद्योगिक निवेश को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान सरकार की रोजगार नीतियों, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और राज्य में आए बड़े औद्योगिक निवेश की सराहना की गई। प्रस्ताव पेश करते हुए विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि 1 अप्रैल 2022 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन ने रोजगार सृजन और औद्योगिक निवेश को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान सरकार की रोजगार नीतियों, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और राज्य में आए बड़े औद्योगिक निवेश की सराहना की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रस्ताव पेश करते हुए विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि 1 अप्रैल 2022 से अब तक योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर <strong>68,228 सरकारी नौकरियां</strong> दी गई हैं। उन्होंने बताया कि 16 मार्च 2022 से 31 जुलाई 2026 तक पंजाब को <strong>1,83,837 करोड़ रुपये</strong> के <strong>9,899 औद्योगिक निवेश प्रस्ताव</strong> प्राप्त हुए हैं, जिनके जरिए राज्य में <strong>6,16,436 नए रोजगार के अवसर</strong> पैदा होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में <strong>16,316</strong>, गृह विभाग में <strong>14,723</strong>, बिजली विभाग में <strong>8,706</strong>, स्थानीय निकाय विभाग में <strong>5,681</strong> और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में <strong>4,758</strong> नियुक्तियां की गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">धालीवाल ने कहा कि पहले पंजाब में सरकारी नौकरियां सिफारिश, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार का शिकार थीं, जिससे योग्य युवाओं का भरोसा व्यवस्था से उठ चुका था। लेकिन मौजूदा सरकार ने पारदर्शी परीक्षाओं और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के जरिए इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अब युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए किसी सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि उन्हें उनकी योग्यता और मेहनत के आधार पर अवसर मिल रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल सरकारी नौकरियों से बेरोजगारी की समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसलिए राज्य सरकार ने &#8216;ईज ऑफ डूइंग बिजनेस&#8217; और नीतिगत स्थिरता के माध्यम से औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया है।</p>
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		<title>स्वास्थ्य योजना की सफलता तभी है, जब ज़रूरत के समय लोगों तक उपचार पहुँच सके : डॉ. बलबीर सिंह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[trendstopicnews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 07:52:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[किसी भी स्वास्थ्य योजना की वास्तविक सफलता केवल इस बात से नहीं आँकी जा सकती कि उस पर कितना ख़र्च हुआ या कितने मामलों का निपटारा हुआ, बल्कि इस बात से तय होती है कि ज़रूरत के समय लोगों को समय पर उपचार मिल पाया या नहीं। भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>किसी भी स्वास्थ्य योजना की वास्तविक सफलता केवल इस बात से नहीं आँकी जा सकती कि उस पर कितना ख़र्च हुआ या कितने मामलों का निपटारा हुआ, बल्कि इस बात से तय होती है कि ज़रूरत के समय लोगों को समय पर उपचार मिल पाया या नहीं। भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत 8 जनवरी 2026 से अब तक 2,91,417 लाभार्थियों को उपचार का लाभ मिल चुका है, जो कि एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक लगभग ₹1,044 करोड़ मूल्य की कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा चुकी हैं। इन आंकड़ों के पीछे हज़ारों ऐसे परिवार हैं, जिन्हें चिकित्सा आपात स्थिति के दौरान इलाज के ख़र्च की चिंता किए बिना अपने प्रियजनों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “किसी भी स्वास्थ्य योजना की सफलता तभी मानी जाती है, जब वह ज़रूरत के समय लोगों तक पहुँचे। मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल आंकड़ों की योजना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि किसी भी मरीज़ को इलाज और आर्थिक बोझ के बीच चुनाव न करना पड़े। प्रत्येक लाभार्थी उस परिवार का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे कठिन समय में इस योजना का सहारा मिला।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने आगे कहा, “हम जानते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएँ लगातार बदल रही हैं और हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम स्वास्थ्य व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाते रहें। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से हम कैशलेस उपचार को अधिक सुलभ बना रहे हैं, स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत कर रहे हैं तथा यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक पात्र नागरिक तक इस योजना का लाभ पहुँचे।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री सेहत योजना से लाभान्वित अनेक लोगों ने इस योजना के प्रति संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की है। सुरेशपाल कौर ने बताया कि कठिन गर्भावस्था के दौरान मुख्यमंत्री सेहत योजना उनके परिवार के लिए संबल बनी। उन्होंने कहा, “गर्भावस्था के दौरान मुझे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो गई थी और सीज़ेरियन डिलीवरी करवाने की ज़रूरत थी। ऐसे समय में सेहत कार्ड हमारे लिए बहुत बड़ी मदद साबित हुआ। जन्म के बाद मेरे बच्चे को विशेष नवजात चिकित्सा (नीओनेटल केयर) की आवश्यकता थी, जिसका पूरा उपचार भी मुख्यमंत्री सेहत योजना के पैकेज के तहत उपलब्ध करवाया गया। इस योजना ने कठिन समय में हमारा साथ दिया और मेरे बच्चे को जीवन की स्वस्थ शुरुआत मिली।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सुनाम की रूपिंदर कौर ने बताया कि कई वर्षों से घुटनों के असहनीय दर्द के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो गया था। उन्होंने कहा, “मैं लंबे समय से घुटनों के गंभीर दर्द से पीड़ित थी, लेकिन ख़र्च की चिंता के कारण ऑपरेशन के बारे में सोच पाना भी मुश्किल था। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मेरा घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) नि:शुल्क हुआ। इस उपचार ने मुझे फिर से सामान्य और बेहतर जीवन जीने का अवसर दिया है।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसी प्रकार तरनतारन के बीर सिंह को हृदय संबंधी बीमारी का पता चलने पर मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत समय पर उपचार मिला। उनका एंजियोग्राफी के साथ पीटीसीए (परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी) किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बीर सिंह ने कहा, “डॉक्टरों ने बताया कि हृदय रोग के उपचार में देरी नहीं की जा सकती और इसका ख़र्च परिवार के लिए बहुत बड़ा बोझ बन सकता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के कारण मुझे समय पर आवश्यक उपचार मिल गया।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री सेहत योजना का प्रभाव अब पूरे पंजाब में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राज्य के प्रत्येक ज़िले के लाभार्थी इस योजना के तहत उपचार प्राप्त कर रहे हैं। स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के ज़िला-वार आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,91,417 लोगों को योजना का लाभ मिल चुका है। ज़िलों में पटियाला 27,892 लाभार्थियों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद बठिंडा में 22,584 तथा लुधियाना में 21,729 लाभार्थियों ने योजना का लाभ प्राप्त किया है। यह दर्शाता है कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पंजाब में इसकी व्यापक माँग है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>योजना के अंतर्गत जालंधर (19,312), होशियारपुर (19,075), अमृतसर (16,550), संगरूर (16,549), श्री मुक्तसर साहिब (14,800), फिरोज़पुर (13,344) तथा गुरदासपुर (12,037) में भी बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त मोगा (11,669), फाज़िल्का (11,516), मानसा (10,539), फरीदकोट (10,309), बरनाला (8,773), तरनतारन (8,714), रूपनगर (8,574), एस.ए.एस. नगर (8,085), फतेहगढ़ साहिब (7,933), शहीद भगत सिंह नगर (6,999), कपूरथला (5,928), पठानकोट (5,844) तथा मालेरकोटला (2,472) के लाभार्थियों ने भी कैशलेस उपचार प्राप्त किया है। यह व्यापक पहुँच इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों सहित प्रदेश के सभी ज़िलों में परिवारों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुँचा रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री सेहत योजना का लगातार बढ़ता दायरा स्वास्थ्य सेवाओं में एक सरल लेकिन महत्त्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। अब लोगों को उपचार शुरू करवाने से पहले यह चिंता नहीं सताती कि वे इसका ख़र्च कैसे उठाएँगे। योजना का विस्तार लगातार जारी है और इसका उद्देश्य स्पष्ट है—पंजाब के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाना।</p>
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		<title>ई-20 पेट्रोल से वाहनों के नुकसान का मुद्दा पंजाब विधानसभा में गूंजा</title>
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		<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 06:16:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब विधानसभा में ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में यह मानने के बावजूद कि ई-20 से वाहनों की माइलेज घटती है, इसे जबरदस्ती थोपा है। उन्होंने कहा कि इस कदम से वाहन मालिकों पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब विधानसभा में ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में यह मानने के बावजूद कि ई-20 से वाहनों की माइलेज घटती है, इसे जबरदस्ती थोपा है। उन्होंने कहा कि इस कदम से वाहन मालिकों पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई है और आरोप लगाया कि इसका मकसद अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करना है, जिसके तहत भारत अगले पाँच सालों में 20 अरब डॉलर का इथेनॉल आयात करेगा। इस बात पर जोर देते हुए कि उपभोक्ताओं को चुनाव के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से फ्यूल स्टेशनों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों उपलब्ध कराने और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए ई-20 की कीमत घटाने की मांग करता हुआ एक प्रस्ताव पारित किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, &#8220;पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान, मैंने उपभोक्ताओं पर ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल थोपे जाने और इससे लोगों के वाहनों को हो रहे नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। यह तेल केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के थोपा गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, इससे 67 फीसदी वाहनों की माइलेज घटी है, जबकि 45 फीसदी वाहनों के इंजन खराब हुए हैं, जिससे आम लोगों पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ा है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, &#8220;केंद्र सरकार ने स्वयं संसद में माना है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों की माइलेज घटाता है। यह सब अमेरिका के साथ हुए एक बड़े व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करने और कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए किया जा रहा है। हमारी मांग है कि फ्यूल स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 के बीच चयन करने का अधिकार दिया जाए और ई-20 की कीमत तुरंत घटाई जाए। पंजाब विधानसभा ने आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इंकलाब जिंदाबाद।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस को समेटते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, &#8220;यह देश के हर नागरिक के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल बिना किसी उचित शोध, वैज्ञानिक अध्ययन या सलाह-मशवरे के वाहन मालिकों पर थोपा गया है। केंद्र सरकार ने यह साबित करने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया और न ही किसी इंजीनियरिंग कॉलेज या आई.आई.टी. से प्रमाण-पत्र लिया है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों के इंजनों के लिए सुरक्षित है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>केंद्र पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, &#8220;ई-10 पेट्रोल पर चलने के लिए डिज़ाइन किए गए इंजनों को व्यापक विरोध के बावजूद मनमाने ढंग से ई-20 पर तब्दील कर दिया गया। 45,000 से अधिक वाहनों के सर्वेक्षण के अनुसार, 67 फीसदी ने माइलेज में भारी गिरावट दर्ज की, जबकि 45 फीसदी इंजन खराब हो गए हैं। यह आम लोगों, जो सालों की बचत और किश्तों पर वाहन खरीदते हैं, की खून-पसीने की कमाई की खुली लूट के अलावा कुछ नहीं है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वाहन मालिकों पर पड़ रहे बोझ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, &#8220;पहले तो आम लोग बड़ी मुश्किल से वाहन खरीदते हैं और फिर उन्हें इस नीति के कारण मरम्मत का अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ता है। यह बहुत अफसोसजनक है कि केंद्र सरकार ई-20 के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी यह मुद्दा उठाया है और दो लाख से अधिक हस्ताक्षर वाली जनता की याचिका तैयार की है, जो वे प्रधानमंत्री को सौंपने जा रहे हैं।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>केंद्र के अपने कबूलनामे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, &#8220;शुरू में केंद्र सरकार ने दावा किया था कि सिर्फ वाहन निर्माता ही माइलेज का निर्धारण कर सकते हैं। लेकिन हर चालक अपने वाहन की माइलेज देख सकता है, जो आधुनिक वाहनों के डैशबोर्ड पर दिखाई देती है। केंद्र ने अब संसद में मान लिया है कि ई-20 पेट्रोल माइलेज को छह फीसदी तक घटा सकता है और यह वाहनों के इंजनों को प्रभावित करता है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस नीति के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, &#8220;यह सिर्फ इथेनॉल के बारे में नहीं, बल्कि इस संबंध में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से है। इस समझौते के तहत भारत अगले पाँच सालों में इथेनॉल के आयात को पाँच गुना बढ़ाकर लगभग एक अरब लीटर से पाँच अरब लीटर करेगा, जो कि लगभग 20 अरब डॉलर बनता है। अमेरिका इथेनॉल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है और भारत को यह बोझ उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, &#8220;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डोनाल्ड ट्रंप के आगे झुकने और उनकी हर बात को स्वीकार करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? अमेरिकी किसान अपनी अतिरिक्त पैदावार का निपटारा कर रहे हैं, जबकि भारतीय उपभोक्ताओं को उसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>केंद्र सरकार की विदेश नीति की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, &#8220;केंद्र के फैसले बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। स्थिति अब यह बन चुकी है कि भारत को कहाँ से कच्चा तेल खरीदना है और कहाँ से नहीं, यह अमेरिका तय करता है। ऑपरेशन सिंधूर के दौरान भी, अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान से संबंधित विकास की घोषणा की थी, जिससे हमारी विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसे लागू करने की समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, &#8220;केंद्र ने असल में 2030 तक ई-20 को लागू करने की योजना बनाई थी। 2026 में इसे लागू करने की क्या जल्दी थी? उन्होंने ई-20 से शुरुआत की है और ई-25 तथा ई-50 को लागू करने से पहले विवाद के ठंडा पड़ने का इंतज़ार कर रहे हैं।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>विधानसभा के रुख को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, &#8220;पंजाब विधानसभा ने इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है। भाजपा सदस्यों ने हिस्सा न लेने का फैसला किया, लेकिन हम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट होनी चाहिए। पहले, लोग लैड और अनलेड पेट्रोल में से एक चुन सकते थे। यह फैसला लोगों की मर्जी को ताक पर रखकर जबरन उन पर थोपा गया है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस नीति की तुलना टोल प्लाज़ा से करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, &#8220;दुनिया भर में, लोगों के पास टोल सड़कों या बिना टोल वाली सड़कों का चयन करने का विकल्प होता है। जब नागरिक पहले ही रोड टैक्स अदा करते हैं, तो उन्हें अलग से टोल टैक्स क्यों देना पड़े? पंजाब सरकार ने 19 टोल प्लाज़ा बंद कर दिए हैं, जिससे यात्रियों को हर रोज़ लगभग 67 लाख रुपये की बचत हो रही है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अपनी मांग को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, &#8220;लोगों को तुरंत पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट दी जानी चाहिए और ई-20 की कीमत घटाई जानी चाहिए। मैंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर उनसे आम लोगों के हितों की रक्षा करने की अपील की है।&#8221;</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>पंजाब देश में सबसे अधिक वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल, कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी आगे: हरपाल सिंह चीमा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[trendstopicnews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 13:11:01 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>यह रेखांकित करते हुए कि पंजाब पहले से ही देश में सबसे अधिक सरकारी वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल है तथा कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां कहा कि पूर्ववर्ती शिरोमणि अकाली दल-भाजपा तथा कांग्रेस सरकारों की नीतियों के कारण राज्य को कर्मचारियों के वेतन आयोग के बकायों के रूप में 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार हाईकोर्ट द्वारा स्वीकृत निपटान योजना के तहत पहले ही 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये का भुगतान कर चुकी है तथा हाईकोर्ट के ताजा फैसले और उपलब्ध कानूनी उपायों का परीक्षण करते हुए सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन आयोग की रिपोर्ट वास्तव में वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई थी, लेकिन इसे कई वर्षों तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा, &#8220;यह रिपोर्ट केवल जुलाई 2021 में लागू की गई। परिणामस्वरूप 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये को स्थगित कर दिया गया, जिससे 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी उत्पन्न हो गई।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वित्त मंत्री ने आगे कहा कि हालांकि तत्कालीन शासनकाल के दौरान वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन बकाया राशियों में से एक रुपया भी जारी किए बिना अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, जिससे पूरा वित्तीय बोझ वर्तमान सरकार पर आ गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8216;आप&#8217; सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विभिन्न कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद पंजाब सरकार ने एक सुनियोजित निपटान योजना तैयार की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, &#8220;14,191 करोड़ रुपये की कुल देनदारी में से &#8216;आप&#8217; सरकार पहले ही कर्मचारियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी है। हाईकोर्ट ने इस निपटान योजना को स्वीकार कर लिया था और इसे लागू करने का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वर्तमान महंगाई भत्ते (डीए) के वितरण संबंधी हाईकोर्ट के ताजा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि एकल पीठ की व्याख्या में कुछ संवैधानिक मानदंडों तथा न्यायिक नज़ीरों की अनदेखी की गई प्रतीत होती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र राज्य के मामले में वर्ष 2005 के संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय देश में सबसे अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, जो कई श्रेणियों में केंद्र सरकार के वेतन ढांचे से भी अधिक हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>विभिन्न पदों के लिए पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के वेतनमानों की तुलना प्रस्तुत करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, &#8220;राज्य सरकार का कानूनी तर्क यह था कि जब राज्य का वेतन ढांचा पहले से ही काफी अधिक हो, तो कोई भी राज्य सरकार एक ही समय में सबसे अधिक मूल वेतनमान और केंद्र की सबसे अधिक डीए दरों—दोनों को बनाए नहीं रख सकती।&#8221;</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने स्वयं यह निर्णय लिया था कि नए भर्ती किए गए कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत शामिल किया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कर्मचारियों के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान किया जाएगा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, &#8220;हमारी कानूनी टीम ताजा फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है, न्यायिक नज़ीरों की समीक्षा कर रही है तथा उपयुक्त कानूनी रास्ता तय करने के लिए विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने की संभावना भी शामिल है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रेस वार्ता का समापन करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पूर्ववर्ती अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारों से भारी वित्तीय बोझ विरासत में मिलने के बावजूद पंजाब सरकार सभी बकाया वित्तीय देनदारियों का योजनाबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से समाधान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।</p>
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		<title>इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब हुई गाड़ियों की मरम्मत में ₹25,000 से ₹50,000 का खर्च आता है: हरपाल सिंह चीमा</title>
		<link>https://theupdatesnews.com/ithenola-blendeda-petrola-se-kharaba-hu-i-gariyom-ki-maram-mata-mem-rs25-000-se-rs50-000-ka-kharca-ata-hai-harapala-sinha-cima/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[trendstopicnews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 12:53:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को अप्रैल 2026 से 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंड (ई-20 पेट्रोल) को ज़बरदस्ती लागू करने की आलोचना की, जबकि असल में डेडलाइन 2030 से आगे बढ़ा दी गई थी। वह अपने पेश किए गए प्रस्ताव के समर्थन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को अप्रैल 2026 से 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंड (ई-20 पेट्रोल) को ज़बरदस्ती लागू करने की आलोचना की, जबकि असल में डेडलाइन 2030 से आगे बढ़ा दी गई थी। वह अपने पेश किए गए प्रस्ताव के समर्थन में सदन में बोल रहे थे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूएस दुनिया का 60 परसेंट इथेनॉल बनाता है जबकि भारत सिर्फ़ 5 परसेंट बनाता है। चीमा ने भाजपा की केंद्र सरकार पर भारतीय उपभोक्ताओं और गाड़ी मालिकों की कीमत पर यीएस और डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर करने का आरोप लगाया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राज्य में इस मुद्दे की गंभीरता पर ध्यान देते हुए, कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, &#8220;पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग के पास अभी 1,25,88,851 रजिस्टर्ड टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर और कमर्शियल गाड़ियां हैं, जबकि पड़ोसी राज्यों से खरीदी गई कुछ दूसरी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन प्रोसेस अभी भी चल रहा है। इतनी ज़्यादा पुरानी गाड़ियों वाले राज्यों पर ज़बरदस्ती ई-20 फ्यूल थोपना बहुत भारी पड़ रहा है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>लोकल मैकेनिकों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया, “इथेनॉल ब्लेंड से खराब हुई कार को ठीक करने का खर्च ₹25,000 से ₹50,000 के बीच है।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने पुरानी गाड़ियों वाले लोगों के लिए दूसरा इंतज़ाम न करने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की भी आलोचना की और चेतावनी दी कि अगर डिलीवरी बॉय और छोटे व्यापारियों की गाड़ियां हर कुछ महीनों में खराब होती रहीं, तो उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया, “केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी संसद में माना था कि फ्यूल माइलेज में 6% की कमी आई है, जबकि असल में एफिशिएंसी का नुकसान बहुत ज़्यादा है। घरेलू वैज्ञानिकों, मैन्युफैक्चरर्स, सांसदों या आम जनता से सलाह किए बिना देश पर ऐसी पॉलिसी थोपना निंदनीय है। यह पॉलिसी देश को कॉर्पोरेट हितों के लिए बेच रही है।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, “इथेनॉल बनाने में बहुत पानी लगता है, जो पंजाब के पहले से ही गिरते भुमिगत पानी लेवल के लिए एक गंभीर खतरा है।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>भारी जन विरोध को हाईलाइट करते हुए, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने हाल ही में आप के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में ऑर्गनाइज़ किए गए एक डायलॉग का ज़िक्र किया, जिसमें 4,000 से 5,000 लोग शामिल हुए थे और 7 लाख लोगों ने इसे ऑनलाइन देखा था। उन्होंने बताया, “उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के मैकेनिक और एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया और इस बात पर अपनी आवाज़ उठाई कि यह पॉलिसी कंज्यूमर्स के लिए कितनी नुकसानदायक है, जिससे यह साबित होता है कि यह एक ज़रूरी और ज़रूरी नेशनल मुद्दा है जिस पर तुरंत दोबारा विचार करने की ज़रूरत है।”</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
		<link>https://theupdatesnews.com/panjaba-vidhanasabha-ke-manasuna-satra-ka-aja-dusara-dina-ka-i-ahama-muddom-para-hogi-carca/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[trendstopicnews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 09:54:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[punjab]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। आज सदन में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों को निपटाए जाने की संभावना है। सरकार की ओर से पंजाब रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया जाएगा। इसके अलावा छह अलग-अलग विभागों की वार्षिक और प्रगति रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी। वहीं, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। आज सदन में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों को निपटाए जाने की संभावना है। सरकार की ओर से <strong>पंजाब रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस (संशोधन) विधेयक, 2026</strong> पेश किया जाएगा। इसके अलावा छह अलग-अलग विभागों की वार्षिक और प्रगति रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं, विपक्षी दलों ने भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। ऐसे में आज भी विधानसभा में तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मानसून सत्र के पहले दिन फार्मेसी परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर सदन का माहौल गर्म रहा। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और सदन से वॉकआउट किया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि, पंजाब सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह पेपर लीक का नहीं, बल्कि हाईटेक नकल का मामला था। सरकार का दावा है कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महज 15 मिनट के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और मामले की जांच जारी है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पंजाब विधानसभा का यह मानसून सत्र 10 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव सदन में पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष विभिन्न जनहित और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>पंजाब में बड़ी साजिश नाकाम, 4 नाबालिग समेत 9 गिरफ्तार</title>
		<link>https://theupdatesnews.com/panjaba-mem-bari-sajisa-nakama-4-nabaliga-sameta-9-giraphtara/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[trendstopicnews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 07:24:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[punjab]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब पुलिस ने राज्य में संदिग्ध नेटवर्कों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए कथित तौर पर आईएसआई समर्थित दो सीमा पार मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में चार नाबालिगों सहित कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से अवैध हथियार और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">पंजाब पुलिस ने राज्य में संदिग्ध नेटवर्कों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए कथित तौर पर आईएसआई समर्थित दो सीमा पार मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में चार नाबालिगों सहित कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से अवैध हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पंजाब के डीजीपी <strong>गौरव यादव</strong> ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन अवैध पिस्तौल, चार पेट्रोल बम और नौ जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पंजाब पुलिस के आतंकवाद विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी विदेश में बैठे कथित आईएसआई हैंडलरों के निर्देश पर काम कर रहे थे। उन पर स्थानीय युवाओं की भर्ती करने, सुरक्षा एजेंसियों की रेकी करने, अवैध हथियार जुटाने और राज्य में कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की साजिश रचने के आरोप हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपियों ने रेलवे ट्रैक के पास निगरानी कैमरे लगाए थे। पुलिस के अनुसार, इन कैमरों से जुटाई गई फुटेज कथित तौर पर विदेश में बैठे हैंडलरों को भेजी जाती थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का उद्देश्य और किन गतिविधियों को अंजाम देना था।</p>
<p>इस संबंध में अमृतसर के मोहकमपुरा, एयरपोर्ट और सी-डिवीजन पुलिस थानों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पंजाब पुलिस पूरे नेटवर्क, उसके अन्य सदस्यों, विदेश में बैठे हैंडलरों से संबंध, वित्तीय लेन-देन और संभावित अन्य गतिविधियों की गहन जांच कर रही है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारुचक ने कनाडा में भारतीय स्टूडेंट्स के पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट संकट पर जताई चिंता, केंद्र सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की</title>
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		<dc:creator><![CDATA[trendstopicnews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 06:14:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारुचक ने कनाडा में भारतीय स्टूडेंट्स, खासकर पंजाबी स्टूडेंट्स के पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट संकट पर केंद्र सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की है। उन्होंने विदेश मंत्रालय से अपील की है कि वह कनाडा सरकार के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत करके प्रभावित भारतीय स्टूडेंट्स को डिपोर्ट होने से बचाए। &#160; मंत्री ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारुचक ने कनाडा में भारतीय स्टूडेंट्स, खासकर पंजाबी स्टूडेंट्स के पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट संकट पर केंद्र सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की है। उन्होंने विदेश मंत्रालय से अपील की है कि वह कनाडा सरकार के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत करके प्रभावित भारतीय स्टूडेंट्स को डिपोर्ट होने से बचाए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मंत्री ने कहा कि ब्रैम्पटन के पोर्टेज कॉलेज में वर्ष 2024 में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स ने अपनी 2 साल की पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरी कर ली है। लेकिन, कनाडा में सरकार बदलने के बाद वहां के प्रशासन ने मनमाने ढंग से नियम बदलकर स्टूडेंट्स के वर्क परमिट रोक दिए हैं। यह सरासर धोखा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारी फीस देने और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद भी, आज हमारे टैलेंटेड बच्चे, जिनमें बड़ी संख्या में बेटियां भी शामिल हैं, भारी बारिश के बीच सड़कों पर टेंट लगाकर विरोध करने को मजबूर हैं।</p>
<p>मंत्री ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय पर भी इस मामले में ढीला रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब देश के बच्चे विदेश में सड़कों पर रो रहे हों, तो भारत सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकती। यह सिर्फ कुछ स्टूडेंट्स का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की आत्म सम्मान और हमारे युवाओं के भविष्य का सवाल है। केंद्र सरकार को इस बेहद सेंसिटिव मुद्दे पर तुरंत कनाडा सरकार के सामने कड़ा डिप्लोमैटिक विरोध दर्ज कराना चाहिए और वर्क परमिट की बहाली सुनिश्चित करनी चाहिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पठानकोट, गुरदासपुर समेत पूरे पंजाब के परिवारों में अपने बच्चों की यह हालत देखकर बहुत चिंता और गुस्सा है। पंजाब सरकार अपने लेवल पर इस मामले को लगातार आगे बढ़ा रही है और हर मुमकिन कदम उठा रही है। लेकिन इंटरनेशनल बातचीत का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, इसलिए मोदी सरकार को तुरंत अपनी नींद से जागना चाहिए और कनाडा सरकार से संपर्क करके इस संकट का तुरंत हल निकालना चाहिए।</p>
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		<title>पजाब सरकार जेन-ज़ी के साथ चट्टान की तरह खड़ी है; विधानसभा में नौजवानों पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[trendstopicnews@gmail.com]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 06:08:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पंजाब विधानसभा ने आज जेन-ज़ी (नौजवान पीढ़ी) के साथ दृढ़ता से खड़े होते हुए और देश के नौजवानों पर हो रहे जुल्मों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए देश भर में एक के बाद एक पेपर लीक के मामलों के खिलाफ जुबानी वोट से निंदा प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव पर बहस को समेटते हुए और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पंजाब विधानसभा ने आज जेन-ज़ी (नौजवान पीढ़ी) के साथ दृढ़ता से खड़े होते हुए और देश के नौजवानों पर हो रहे जुल्मों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए देश भर में एक के बाद एक पेपर लीक के मामलों के खिलाफ जुबानी वोट से निंदा प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव पर बहस को समेटते हुए और फिर मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के राज में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों ने करोड़ों छात्रों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है, जबकि इंसाफ मांगने वालों को जवाबदेही की बजाय अश्रु गैस के गोलों, पैलेट गनों और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि पंजाब सरकार यह निंदा प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी, जिसमें केंद्र को पेपर लीक के मामलों को रोकने और देश की शिक्षा प्रणाली की मजबूती के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस ने सदन से वाकआउट कर दिया।</p>
<p>देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “देश को विश्वगुरु बनाने का दावा करने वालों ने देश भर में एक के बाद एक हो रहे पेपर लीक के मामलों को रोकने में अपनी नाकामी से शिक्षा प्रणाली का मजाक बना दिया है। पेपर लीक यानी परीक्षा पत्र की बिक्री, परीक्षार्थियों के सपनों को तोड़ देती है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि नीट परीक्षा के 22 उम्मीदवारों ने निराशा में खुदकुशी तक कर ली। उन्होंने कहा कि जब से (साल 2014) भाजपा सरकार ने सत्ता संभाली है, देश में 93 पेपर लीक हो चुके हैं।”</p>
<p>पेपर लीक से संबंधित आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “2019 से 2024 के बीच पेपर लीक के ऐसे मामलों की संख्या 65 थी और सबसे ज्यादा पेपर लीक भाजपा के नेतृत्व वाली राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की सरकारों में हुए। प्रधानमंत्री, जो छात्रों को परीक्षाओं में बैठने के नुस्खे बताते रहते हैं, पेपर लीक रोकने में नाकाम रहे हैं। उस प्रधानमंत्री से और क्या उम्मीद की जा सकती है जिसकी अपनी डिग्री का ही कोई पता नहीं है।”</p>
<p>छात्रों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “ये नेता अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए स्कूल पाठ्यक्रम को बदल रहे हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश के छात्रों ने प्रधानमंत्री को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर कर दिया, जो देश में पेपर लीक रोकने में पूरी तरह असफल रहे। छात्रों के खिलाफ अश्रु गैस, जोरदार पुलिस बल, पैलेट गनों और अन्य पैतरों के इस्तेमाल के दौरान केंद्र सरकार की धौंसशाही बेहद निंदनीय है।”</p>
<p>इस मुद्दे पर बात जारी रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूरी दुनिया में पैलेट गनों पर पाबंदी है, लेकिन केंद्र सरकार ने निर्दोष छात्रों के खिलाफ बेरहमी से इनका इस्तेमाल किया है। परीक्षाओं को निष्पक्षता से करवाने का वादा करने की बजाय, प्रधानमंत्री लोगों को गुमराह करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का वादा कर रहे हैं। यह सिस्टम का मजाक बनाना नहीं तो और क्या है कि केंद्र सरकार परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए रक्षा सेवाओं का सहयोग ले रही है।”</p>
<p>छात्रों और उनके परिवारों पर पेपर लीक के पड़ने वाले प्रभावों को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पेपर लीक होने के कारण छात्रों को घोर संताप झेलना पड़ता है। ऐसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र अपने परिवारों की उम्मीद होते हैं। हालांकि, जब ऐसे पेपर लीक के नाम पर अमीर लोगों को बेचे जाते हैं, तो आम छात्रों/परीक्षार्थियों के सपने चकनाचूर हो जाते हैं। ये नेता देश के नौजवानों के भविष्य से खेल रहे हैं, जिसके कारण जेन-ज़ी को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा और उन पर बहुत अत्याचार हुए।”</p>
<p>मौजूदा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ऐसे पेपर लीक देश की शिक्षा प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करते हैं और इसीलिए हमारे देश की डिग्रियों की विदेशों में कोई कदर नहीं है। इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बजाय केंद्र सरकार उनका बचाव कर रही है। प्रधानमंत्री छात्रों को परीक्षाओं की तैयारी करना सिखाते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार अधीन आने वाली संस्थाओं को कभी यह नहीं सिखाया कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा के साथ परीक्षाएं कैसे करवाई जाती हैं।”</p>
<p>केंद्र के समूचे कार्यकाल के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार की विदेश नीति देश के हितों और अखंडता की रक्षा में बुरी तरह असफल रही है। वाशिंगटन में व्हाइट हाउस में बैठे लोग देश की नीतियों में दखल दे रहे हैं। यह देश में बन रहे बेहद घिनौने और बुरे हालातों की झलक है क्योंकि केंद्र सरकार अपनी ड्यूटी निभाने में पूरी तरह फेल हो चुकी है।”</p>
<p>बहस के बाद अपनी सरकार की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार आज विधानसभा में यह निंदा प्रस्ताव लेकर आई है। पारित किया गया यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा ताकि देश की शिक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही दखलंदाजी और नीट जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मुद्दा उनके ध्यान में लाया जा सके।”</p>
<p>जांच के बावजूद बार-बार होते पेपर लीक का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन पेपरों के लीक होने के कारण करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। हर बार सीबीआई जांच के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन किसी को सजा नहीं मिलती। यह महज एक रस्म बनकर रह गया है। अब भी प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि मामले का फैसला फास्ट-ट्रैक अदालतों में किया जाएगा। इसका मतलब है कि पेपर लीक होते रहेंगे और केवल केसों के फैसले बाद में होते रहेंगे।”</p>
<p>मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आज परीक्षाएं करवाने के लिए फौज की मदद ली जा रही है। इससे बड़ी त्रासदी और क्या हो सकती है? हम विश्वगुरु बनने के दावे करते हैं, लेकिन हम अपनी परीक्षाएं भी सही ढंग से नहीं करवा पा रहे। बार-बार पेपर लीक होने से जिन छात्रों ने भारत से ईमानदारी से एमबीबीएस, वेटरनरी, इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर डिग्रियां हासिल भी की हैं, जब वे विदेश जाते हैं तो उन्हें दोबारा पढ़ने या नए टेस्ट पास करने के लिए कहा जाता है। विदेशी संस्थानों और कंपनियों का कहना है कि उन्हें हमारी परीक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं है। फिर भी ये लोग भारत को विश्वगुरु बनाने की बातें करते हैं।”</p>
<p>पीड़ित छात्रों के लिए इंसाफ की मांग करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हम इस पूरे घटनाक्रम की पुरजोर निंदा करते हैं। अपने हकों के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज किए गए केस तुरंत वापस लिए जाएं। केंद्र सरकार के वादे मुताबिक खुदकुशी करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। भारत सरकार को यह भी यकीनी बनाना चाहिए कि ऐसी घटनाएं भविष्य में कभी न दोहराई जाएं।”</p>
<p>बहस के दौरान कांग्रेस के रवैये पर निराशा जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “कांग्रेस को छोड़कर सदन के लगभग हर सदस्य ने निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया। कांग्रेस ने बहस का बहिष्कार करने का रास्ता चुना। यह बहुत अफसोसजनक है कि जब देश भर के छात्र अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं तो कांग्रेस बार-बार होते पेपर लीक जैसे अहम मुद्दे पर भी उनके साथ नहीं खड़ी हुई। उन्हें राजनीति से ऊपर उठकर नौजवानों के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ बोलने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने वाकआउट करना मुनासिब समझा।”</p>
<p>मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आज जब मैं विधानसभा में बोल रहा था तो विरोधी दल की सीटें खाली पड़ी थी। यह 2027 की एक झलक है। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस में हिस्सा लेने की बजाय उन्होंने कार्रवाई का बहिष्कार किया। एक तरफ उनके नेता शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर प्रधानमंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन करते हैं और दूसरी तरफ जब उन्हें सदन में उसी मुद्दे पर बहस करने का मौका मिलता है तो वे वाकआउट कर जाते हैं।”</p>
<p>परीक्षाओं के मामले में पंजाब के रिकॉर्ड को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार के पिछले चार सालों से ज्यादा के कार्यकाल के दौरान पंजाब में पेपर लीक की एक भी घटना नहीं हुई। कुछ परीक्षाओं के दौरान नकल के मामले सामने आए थे, लेकिन वे मामले सरकार द्वारा खुद ही पकड़े गए थे। चाहे किसी ने नकल करने के लिए डिजिटल उपकरणों, स्कैनिंग पेन या किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया हो, सख्त कार्रवाई की गई, एफआईआर दर्ज की गईं और दोषियों को जेल भेजा गया। नकल करना और पेपर लीक होना, दो अलग-अलग बातें हैं और विरोधी दल जानबूझकर इन दोनों को उलझाने की कोशिश कर रहा है।”</p>
<p>परीक्षा से संबंधित अपराधों में शामिल गिरोहों पर की गई कार्रवाई का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “ऐसे मामलों में शामिल गिरोहों की पहचान करके कार्रवाई की गई है। इससे पहले भी भर्ती परीक्षाओं के दौरान हरियाणा से चल रहे गिरोहों को गिरफ्तार किया गया था। मेरे पास पूरी सूची है जो दर्शाती है कि सबसे ज्यादा पेपर लीक भाजपा शासित राज्यों में हुए हैं।”</p>
<p>पंजाब की पारदर्शी भर्ती नीति पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब में सरकारी नौकरियां पाने के लिए सिर्फ योग्यता (मेरिट) ही एकमात्र मापदंड है। कोई सिफारिश नहीं, कोई रिश्वत नहीं, पारदर्शी तरीके से केवल मेरिट के आधार पर ही सरकारी नौकरियां दी जाती हैं। अब तक नौजवानों को 68,000 से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं।”</p>
<p>शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदेश सरकार के अथक प्रयासों के कारण पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में पहला स्थान हासिल किया है। प्रदेश सरकार ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाया है और व्यवस्था को मजबूत किया है, स्मार्ट क्लासरूम शुरू किए हैं और शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण दिया है।”</p>
<p>शिक्षा क्षेत्र में आए बदलाव पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “इन प्रयासों के परिणामस्वरूप स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब अग्रणी बनकर उभर रहा है। भारत सरकार की मुख्य संस्थाओं में से एक, नीति आयोग ने नए आंकड़े जारी किए हैं जो दर्शाते हैं कि पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में पहला स्थान हासिल किया है। पिछले चार सालों से प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के प्रशिक्षण, पढ़ाने के आधुनिक तरीकों और स्मार्ट क्लासरूमों पर ध्यान केंद्रित किया है, और आज पंजाब शिखर पर खड़ा है। पहले केरल पहले नंबर पर था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से पहला स्थान हासिल कर लिया है। आने वाले समय में भी ऐसे और प्रयास किए जाएंगे।”</p>
<p>गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदेश सरकार का दृढ़ विश्वास है कि हर बच्चे को, चाहे उसका आर्थिक पिछड़ापन कोई भी हो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और सरकार के उपक्रमों का उद्देश्य यह यकीनी बनाना है कि आम परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने के वही मौके मिलें जो बाकियों को मिलते हैं। आने वाली पीढ़ियों को शक्तिशाली बनाने और खुशहाल पंजाब के निर्माण के लिए शिक्षा सबसे बड़ा साधन है और प्रदेश सरकार इसे मजबूत करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी।”</p>
<p>पंजाब के शिक्षा क्षेत्र के सफर को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जब मैंने पद संभाला था तो स्कूली शिक्षा में प्रदेश 27वें नंबर पर था। आज यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब पहले नंबर पर खड़ा है। जहां 2021 में सरकारी स्कूलों के सिर्फ 80 छात्रों ने नीट परीक्षा पास की थी, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 881 छात्र हो गई है, जो कि पंजाब के सरकारी स्कूलों की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है और लोगों के जीवन को बदलने के लिए शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाए हैं।”</p>
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