मार्च के शुरुआत से ही मौसम का मिजाज बदलने लगा है। आमतौर पर मार्च के शुरुआती दिनों में हल्की ठंडक और सुहावना वातावरण रहता है, लेकिन इस वर्ष महीने की शुरुआत में ही दोपहर के समय तेज धूप और बढ़ती गर्मी का अहसास होने लगा है।
सुबह और शाम को हल्की ठंडक जरूर बनी हुई है, परंतु दोपहर में तापमान में अचानक वृद्धि ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बढ़ती गर्मी ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। गेहूं और सरसों जैसी फसलें इस समय पकने की अवस्था में होती हैं।
यदि तापमान सामान्य से अधिक रहा तो दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे पैदावार में कमी की आशंका है। कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मार्च में असामान्य गर्मी फसलों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में इस तरह की बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक तापमान में निरंतर वृद्धि यानी ग्लोबल वार्मिंग एक प्रमुख कारण है।
अचानक बढ़ती गर्मी का असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिहाइड्रेशन, थकावट और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह अधिक खतरनाक हो सकता है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पौधारोपण को बढ़ावा देना, वाहनों का कम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन को अपनाना और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है। सरकार को भी प्रदूषण नियंत्रण और हरित क्षेत्रों के संरक्षण के लिए सख्त नीतियां लागू करनी होंगी। वहीं आम नागरिकों को भी पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझना होगा।