चंडीगढ़ से पंजाब की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी और डॉक्टर डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से दायर मानहानि मामले में चंडीगढ़ की अदालत ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने मामले में प्रतिवादियों को अगली सुनवाई तक डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ कथित तौर पर झूठी और बिना पुष्टि वाली मानहानिकारक सामग्री सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से पोस्ट या प्रसारित करने से रोक दिया है।
सिविल जज (जूनियर डिवीजन) डॉ. परीक्षित की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से पेश हुए वकील सुखबीर सिंह और गिन्नीजित मल्होत्रा ने अदालत के सामने दलील दी कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर कथित तौर पर गलत और बेबुनियाद प्रचार किया जा रहा है।
मामले में आरोप लगाए गए थे कि डॉ. गुरप्रीत कौर ने एक दुष्कर्म मामले के आरोपी को बचाने के बदले 5 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का कथित प्रस्ताव रखा था। याचिका में कहा गया कि इस तरह के दावे DD News Live, X, Facebook और YouTube समेत अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए गए।
मामले में सिमरनजीत हुंदल नाम के व्यक्ति को कथित तौर पर बिचौलिया बताए जाने का भी जिक्र किया गया। हालांकि, अदालत के सामने यह बात रखी गई कि सिमरनजीत हुंदल ने अपने Instagram अकाउंट पर एक वीडियो जारी कर इन आरोपों से इनकार किया है। उसने कथित तौर पर कहा कि उसका डॉ. गुरप्रीत कौर से कोई संबंध नहीं है और वह उनसे कभी मिला भी नहीं है।
अदालत ने शुरुआती स्तर पर मामले को देखने के बाद कहा कि प्रतिवादियों की ओर से लगाए गए आरोप बिना ठोस सबूत और उचित पुष्टि के सोशल मीडिया पर डाले गए प्रतीत होते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसके सम्मान और निजता से जुड़ी होती है। वहीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्ति की प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
इसी आधार पर अदालत ने फिलहाल प्रतिवादियों को डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ कथित रूप से झूठी और मानहानिकारक सामग्री को आगे पोस्ट या प्रसारित करने से रोक दिया है। हालांकि, अदालत ने सोशल मीडिया पर पहले से मौजूद पोस्ट और वीडियो को तुरंत हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि दूसरी तरफ को सुने बिना पुरानी पोस्ट या वीडियो हटाने का आदेश देना मुख्य मामले के अंतिम निपटारे के समान हो सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर तत्काल अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया।
वहीं, सोशल मीडिया से कथित आपत्तिजनक सामग्री हटाने की मांग को लेकर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया है। अब मामले में अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 को होगी। उस सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा।
फिलहाल अदालत के इस अंतरिम आदेश को डॉ. गुरप्रीत कौर के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह आदेश मामले का अंतिम फैसला नहीं है और मानहानि से जुड़े मुख्य विवाद पर अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही होगा।