आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने रविवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी पर तीखा हमला बोला। पन्नू ने आरोप लगाया कि धामी इंसाफ, सच और गुरु साहिब के साथ खड़े होने की बजाय शिरोमणि अकाली दल (बादल) के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे हैं।
एक दिन पहले चंडीगढ़ में हरजिंदर सिंह धामी द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि धामी ने भले ही यह दावा किया हो कि वे मीडिया के माध्यम से अपना पक्ष जनता के सामने रखना चाहते हैं, लेकिन उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस का न्योता एक राजनीतिक दल—शिरोमणि अकाली दल (बादल)—की ओर से जारी किया गया था।
पन्नू ने कहा कि धामी साहब अकसर इस बात पर आपत्ति जताते हैं कि उन्हें अकाली दल का प्रवक्ता कहा जाता है, लेकिन हाल ही में उन्होंने खुद यह स्वीकार किया कि उन्हें अकाली दल का सिपाही होने पर गर्व है। पन्नू ने तंज कसते हुए कहा, “अच्छा होता अगर वे गुरु साहिब के सिपाही होते।”
“एफआईआर और पुलिस की जरूरत नहीं” बयान भ्रामक
हरजिंदर सिंह धामी के उस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि शिरोमणि कमेटी एफआईआर को स्वीकार नहीं करती और उसे पुलिस की जरूरत नहीं है, बलतेज पन्नू ने इसे पूरी तरह भ्रामक करार दिया। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी स्वयं एक कानून के तहत बनी संस्था है। जब भी SGPC अमृतसर में जनरल हाउस की बैठक बुलाती है, उसे डिप्टी कमिश्नर से अनुमति लेनी पड़ती है। ऐसे में एफआईआर और पुलिस व्यवस्था को नकारना कैसे उचित हो सकता है?
जब जरूरत पड़ी, तब पुलिस और एफआईआर स्वीकार की गई
पन्नू ने कई उदाहरण गिनाते हुए कहा कि शिरोमणि कमेटी ने अतीत में स्वयं पुलिस से संपर्क किया है। उन्होंने SGPC के पूर्व सचिव द्वारा टेक सिंह धनौला (जो वर्तमान में जत्थेदार हैं) के खिलाफ दर्ज करवाई गई एफआईआर का जिक्र किया, जिसमें धारा 420 के तहत मामला दर्ज हुआ और गिरफ्तारी भी हुई। पन्नू ने कहा, “जब जरूरत होती है, तब एफआईआर भी स्वीकार है और पुलिस भी।”
बेअदबी पर सख्त कानून बनाने की प्रक्रिया जारी
बेअदबी के मुद्दे पर बलतेज पन्नू ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह ने हाल ही में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव पहले ही पंजाब विधानसभा में आ चुका है। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि ऐसा सख्त राज्य कानून बनाया जा सके जिससे भविष्य में कोई इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न कर सके।
पुराने आरोपों की आड़ में पुलिस पर शक पैदा करने की कोशिश
पन्नू ने धामी द्वारा पुराने मामलों का हवाला देकर पुलिस व्यवस्था पर शक पैदा करने की कोशिश को भी खारिज कर दिया। उन्होंने अपने दो दशक के पत्रकारिता अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि यदि 1996 से लेकर 2017 तक के दौर को देखा जाए, तो अकाली सरकारों ने उन्हीं अफसरों को तरक्की दी जिन पर नौजवानों पर अत्याचार के गंभीर आरोप थे। उन्होंने सवाल किया कि सुमेध सैनी को डीजीपी किसने बनाया और मोहम्मद इजहार आलम को किसने आगे बढ़ाया?
असली सवाल से बच रहे हैं धामी: 328 सरूप कहां हैं?
बलतेज पन्नू ने कहा कि असली और सीधा सवाल यह है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 लापता पावन सरूप कहां हैं। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी पिछले पांच वर्षों में इन सरूपों का पता लगाने में पूरी तरह असफल रही है।
ईशर सिंह रिपोर्ट की अनदेखी का आरोप
ईशर सिंह समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पन्नू ने कहा कि रिपोर्ट में साफ लिखा था कि दोषियों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए, क्योंकि इससे जिम्मेदारी से बचा जा सकता है। इसके बावजूद हरजिंदर सिंह धामी ने रूप सिंह का इस्तीफा स्वीकार किया, उनके बकाए निपटाए गए और उन्हें विदेश भेज दिया गया। पन्नू ने आरोप लगाया कि यह सब अपने करीबी लोगों को बचाने के लिए किया गया।
एस.एस. कोहली मामले में सच्चाई दबाने का आरोप
बलतेज पन्नू ने दावा किया कि जब एस.एस. कोहली का नाम सामने आया, तो धामी की पार्टी से जुड़े एक न्यूज चैनल ने खबर को दबा दिया। उन्होंने कहा कि संभव है कि कोहली कई बड़े रहस्यों को जानता हो, जिन्हें अब SIT सामने लाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि ईशर सिंह रिपोर्ट के अनुसार 75 प्रतिशत भुगतान एस.एस. कोहली से वसूला जाना चाहिए था, लेकिन पांच सालों में इस दिशा में कुछ नहीं किया गया। पन्नू ने सवाल किया कि सिख जुडिशियल गुरुद्वारा कमीशन ने भी इतने वर्षों में क्या कार्रवाई की?
गुरु की गोलक के पैसों की वसूली क्यों नहीं?
पन्नू ने सवाल उठाया कि शिरोमणि कमेटी गुरु की गोलक से गए लगभग 10 करोड़ रुपये वापस लेने में पांच साल तक कैसे नाकाम रही। उन्होंने कहा कि करीब 7.5 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी, लेकिन यह क्यों नहीं की गई?
बेअदबी और कोटकपूरा गोलीकांड का जिक्र
अंत में बलतेज पन्नू ने 1 जून 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला में सरूप चोरी और बाद में हुई बेअदबी की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय शिरोमणि कमेटी कोई ठोस कार्रवाई करने में विफल रही। उन्होंने कोटकपूरा गोलीकांड का भी उल्लेख किया, जिसमें इंसाफ मांग रहे श्रद्धालुओं पर पानी की बौछारें और गोलियां चलाई गईं। पन्नू ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल समेत कई नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थीं और उन्हें अदालत से जमानत लेनी पड़ी थी।
उन्होंने कहा कि यही कानून से ऊपर होने के दावों की असली हकीकत है।